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बस्तर का प्राकृतिक नजारा अदभुत है


यदि आप प्रकृति को बहुत करीब से देखना चाहते हैं, यदि आप कुदरत की कलाकारी की एक झलक पाना चाहते हैं तो छ.ग. के बस्तर से अधिक खूबसूरत जगह हो ही नही सकती ।
शादी के 22 वर्षों में कई बार मेरी पत्नि सीमा ने बस्तर देखनें की इच्छा प्रकट की। वह बस्तर शिल्प वाले बेलमेटल की कलाकारी, लकड़ी पर कढ़ाई तथा मिट्टी सिरामिक की खूबसूरत आकृतियों की जबर्दस्त प्रशंसक रहीं हैं । इसी तरह मेरे साले नासिक के अमर कलंत्री ने भी अनेकों बार बस्तर दर्शन की उत्सुकता दिखाई। किसी न किसी कारण से बस्तर यात्रा टलते जा रही थी। इस बार गर्मिंयों में ही हम सबने मिलकर तय किया कि ठंड की छुट्टियो में बस्तर का कार्यक्रम सपरिवार जरुर बनायेंगे । इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हमने मेरी इंदौर वाली साली कविता व उनके पति दामोदर असावा को भी आमंत्रित किया । जिस पर उन्होने आरंभिक स्वीकृति दे दी । इस बात से सीमा अत्याधिक उत्साहित थी। पढ़ सुनकर उसे बस्तर के बारे में जो भी जानकारी मिलती, उन्हे हम सबके साथ शेयर करती । अपनी भाभी कोमल से कहती इस बार आपकी जिम्मेदारी है कि मेरे भाई को लेकर यहां भिलाई पहुंचे ।
3 माह पूर्व सीमा और मैनें कार्यक्रम की अंतिम रुपरेखा बनाकर अपने साले व साढू को खबर दे दी । समय जैसे जैसे पास आते जाता हमारी एक दूसरे से टेलिफोन पर चर्चा बढ़ने लगी । पहले सप्ताह में एक बार होती थी फिर रोज होने लगी अंतिम समय के करीब दिन में दो बार मोबाईल में बातें होती । सीमा जोर शोर से घर की सजावट में भिड़ गयी और मैं अपने दोस्तों शंकर भैया और राधा किशन भाई से बस्तर की जानकारी व वहां व्यवस्था में मदद लेने लगा ।
जगदलपुर, बस्तर का मुख्य केन्द्र है। हमने वहां ठहर कर अन्य जगह जाना तय किया । जगदलपुर जाने के लिए भिलाई से धमतरी होते हुए जाना होता है, दूरी लगभग 280 किमी है । रास्ता भिलाई- दुर्ग- गुंडरदेही- धमतरी- चारामा- कांकेर- केशकाल- कोंडागांव- जगदलपुर है । चूंकि हम लोगों की संख्या 9 हो रही थी इसलिए नेहरु नगर के ताजर भाई के तरफ से टाटा विंगर गाड़ी 12 सीट वाली दी गयी। बस्तर निकलने के पूर्व तिथि से एक दिन पहले 23.12.2011 को नासिक से अमर कोमल अपनें बच्चों अनुष्का एवं गौरंग के साथ पहुंच गये । वहीे देर शाम इन्दौर से दामोदर जी असावा व कविता पहुंच गये। पहली रात देर तक ड्राइव्हर टाटा विंगर गाड़ी की सर्विसिंग व डीजल टैंक फुल करवा लाए । रात को एक बार फिर से सबने मिलकर पूरी तैयारियों का जायजा लिया और सुबह 6 बजे निकलने का तय किया । अगली सुबह 6 बजे तक सब तैयार होकर सामान के साथ नास्ता इडली चटनी सांभर खा कर टाटा विंगर में बैठ गये और निकल पड़े एक बेहतरीन यात्रा पर। ठंड होने के कारण हम सबने गरम कपड़े पहने हुए थे। बच्चे बहुत अधिक उत्साहित थे और खुशी में जोर जोर से बातें कर रहे थे । अभी कुछ ही दूर आगे गये होंगे कि उन लोंगो ने चिप्स कूरकूरे निकाल लिये । इसके साथ इंदौर से लाये नमकीन व भिलाई उत्कल के पेड़े,सैण्डविच खाने का दौर भी चला। कुछ देर शोरगुल हल्लेगुल्ले के बाद लगभग सभी अपनी आंखें बंद कर देर रात और सुबह जल्दी जागरण के कारण हुई नींद की कमी को पूरा करने लगे। धमतरी पहुंच कर फिर एक बार चाय का दौर चला। उसके आगे उगते सूरज व जंगल का दृश्य दिखने लगा था । कांकेर के बाद केशकाल घाटी में उपर फारेस्ट वालों का बेहद मनोरम गेस्ट हाऊस है। इस गेस्ट हाऊस में उतर कर, कुछ देर आराम कर फ्रेश होने के बाद, सब दौड़ भाग कर उंचाईयों पर बनें वाच टॉवर जा पहुंचे। चारों ओर प्रकृति के खूबसूरत नजारे ने हम सब पिकनिक मूड से भरे लोगों को अभिभूत कर दिया । नीचे गेस्ट हाऊस में हमारे एक मित्र के द्वारा कराया गया था पोहा गरम पकौड़े बर्फी चाय इत्यादि का इंतजाम, इसका आनंद उठाकर हम सब पूरी तरह से चार्ज हो गये और आगे निकल पड़े । हमारी जानकारी के मुताबिक कोंडागांव के पहले व 4 किमी बाद में बस्तर आर्ट की सामग्री बनाने के उद्योग लगे थे । सो हम सबसे पहले वहां गये। बेलमेटल की मूर्तियां जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी ही मेहनत के साथ उन्हे बनाना पड़ता है । पैटर्न मोल्ड बनाना ढलाई व उसकी फीनिशिंग के तरीके सामान्य से हटकर है। इसके अतिरिक्त मिट्टी सिरामिक की कलाकृतियां व लकड़ी पर घढ़ाई से बनाई गयी आकृतियां लाजवाब थी । हमने कुछ चीजें खरीदी व कुछ का आर्डर दिया तथा डिस्काउंट भी लिया । हमें पता लग चुका था कि इतनी व्हेरायटी जगदलपुर में नही मिलेगी ।
कोंडागांव से निकलकर सीधे जगदलपुर पहुंचे पूछते पूछाते ''नमन बस्तर'' जहां हमारी बुकिंग थी, वहां पहुंचे। बस्तर में इतना मनोरम एवं आनंददायी रिसॉर्ट देखकर हम खुश थे । बच्चे लॉन में बैडमिंटन खेलने लगे । हम थोड़ी देर आराम कर फ्रेश हो 1.30 बजे लंच लेने डायनिंग हॉल में चले गये। अच्छे खाने के बाद हमनें एक घंटा आराम किया । 3.30 बजे चाय पीकर हम वहां से लगभग पैतींस किमी दूर चित्रकोट जलप्रपात ( वाटर फॉल ) देखने निकल गये । चित्रकोट वाटर फॉल को भारत का सबसे चौड़ा वाटर फॉल माना जाता है । यह कांगेरवेली नेशनल पार्क के मध्य में है। इंद्रावती नदी के ऊपर स्थित घोड़े की नाल की आकृति के इस जल प्रपात में पानी 100 फीट ऊंचाई से नीचे गिरता है । इस जलप्रपात की खासियत ये है कि इसमें बेहद खूबसूरत इंद्रधनुष दिखाई देता है । बारिश के दिनों में इन्द्रावती नदी का यह वॉटर फॉल विश्व के सबसे खूबसूरत माने जाने वाले नियाग्रा जलप्रपात ( अमेरिका-कनाडा ) से ज्यादा चौड़ा खूबसूरत हो जाता है । नीचे उतरने पर सुखी रेतीले जगहों पर बस्तर उत्सव के समय ( अक्टूबर-नवम्बर ) सर्वसुविधा युक्त टेंट हाऊस बनाये जाते हैं। जिन्हे छ.ग. पर्यटन विभाग द्वारा बुक किया जा सकता है। वॉटर फॉल के सामने सरकारी रेस्ट हाऊस है उसे बहुत खूबसूरत ढंग से बनाया गया है। उसके कमरों में एक दीवार की जगह पूरा कांच लगाया गया है। जिससे कमरे के भीतर से ही जल प्रपात का विहंगम दृश्य दिखाई देता है । इसके एक कमरे में अपने छ.ग. प्रवास के दौरान राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटील भी ठहरी थी। हमारे शासकीय मित्रों के मदद से उसी कमरे में हमारे नाश्ते पानी का इंतजाम किया गया था । जल प्रपात का बेहद खूबसूरत नजारे व आवाज के साथ बिस्तर पर लेटना, नाश्ता करना, स्वर्गीक आनंद दे रहा था। बच्चों सहित हम सभी भाव विभोर हो गये थे। लौटने का मन नही हो रहा था। अगले दिन हमें अद्भुत तीरथ गढ़ और कुटुम्बसर गुफायें देखनी थी, सो हमें वापस लौटना पड़ा ।

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बस्तर का प्राकृतिक नजारा अदभुत है पहले समस्या का असली कारण ढ़ूंढे, फिर हल निकाले सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से आईपीएल 2011 आंखों देखा हाल वह कच्ची उम्र और प्यार की कसक नये रायपुर की यादगार पिकनिक .' कच्ची मिट्टी को आकार मिलने की उम्र ' ''वो खवाबों के दिन'' ''लेखन के साथ साक्षात्कार'' कभी-कभी ऐसा होता है मौत से साक्षात्कार मेरी पहली विदेश यात्रा जो देख रहा हूं मैं, वह कहीं ख्वाब तो नहीं शंकर भवन राजनांदगांव की यादें
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