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गुवाहाटी: प्रकृति और भक्ति का संगम


कामाख्या मंदिर
गुवाहाटी घूमने जाएं और कमाख्या मंदिर के दर्शन न करें, ऐसा हो ही नहीं सकता। कामाख्या मंदिर नीलांचल पर्वत के टॉप और गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण कार्य 10वीं सदी में हुआ था। यह स्थान हिंदू धर्म में शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है। मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं की सारी थकान छूमंतर कर देता है। कहते हैं कि अगर सच्ची भावना से यहां पर मुराद मांगी जाएं तो वो अवश्य ही फलित होती है।
उमानंद मंदिर
उमानंद मंदिर बह्मपुत्र नदी के बीचों बीच पिकॉक द्वीप पर स्थित है। दर्शन करने वाले यात्री आने-जाने के लिए बोट यूज करते हैं। जिस पर्वत पर इस मंदिर का निर्माण हुआ है, उसे भस्मशाला कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की आराधना में खलल डालने के कारण कामदेव को भस्म हो जाने का श्राप मिला था, जिसके चलते इस पर्वत का नाम भस्मशाला पड़ा। मंदिर के अंदरूनी परिसर का निर्माण काले, सफेद और लाल पत्थरों से किया गया है। सोमवार के दिन मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले लोगों का तांता लगा रहता है।
नवग्रह मंदिर
नवग्रह मंदिर चित्रांचल पर्वत पर स्थित है। जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि मंदिर नौ ग्रहों को समर्पित है। नवग्रह मंदिर गुवाहाटी के एस्ट्रोलॉजिकल और एस्ट्रोनॉमिकल रिसर्च का सेंटर भी है। इस मंदिर का निर्माण 18 वीं सदी के अंत में राजा राजेश्वर सिंह ने करवाया था।
वशिष्ठ आश्रम
शिव मंदिर के निर्माण के साथ ही राजा राजेश्वर सिंह ने 853 बीघा जमीन आश्रम के निर्माण के लिए दे दी गई थी , जहां इस आश्रम का निर्माण किया गया। यह आश्रम गुवाहाटी से 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। आश्रम के पास ही गरभंगा रिजर्व फारेस्ट भी है। माना जाता है कि यहीं पर वशिष्ठ मुनि रहते थे। इस आश्रम में आपको दुर्लभ जड़ी - बूटियों के भंडार मिल जाएंगे।
आसपास की जगहें
काजीरंगा नैशनल पार्क
वाइल्ड लाइफ के शौकीन लोगों का तो यह फेवरिट स्पॉट है। काजीरंगा नैशनल पार्क की अहमियत को देखते हुए इसे 1985 में वर्ल्ड हेरिटेज घोषित कर दिया गया। काजीरंगा नैशनल पार्क 429.93 किलोमीटर में फै ला हुआ है। पार्क में असम के स्टेट सिंबल एक सींग वाले गैंडे के साथ टाइगर , हाथी , तेंदुआ , चीता जैसे वाइल्ड जानवरों के साथ ही पक्षियों की भी ढेरों वैराइटी है। यहां रहने वाले जानवरांे के लिए प्राकृतिक माहौल तैयार किया जाता है। यह पिकनिक , एडवेंचर , स्पॉट और आउटिंग का हॉट स्पॉट है। आप गुवाहाटी से 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मानस नैशनल पार्क भी जा सकते हैं।
पांडु
रेलवे टाऊनशिप से थोड़ी दूरी स्थित इस जगह का नाम राजा पांडु के नाम पर पड़ा। छोटी - सी पहाड़ी पर ही पांडु नाथ मंदिर का निर्माण किया गया है। ऐसा माना जाता है कि पांडव यहां आकर गणेश जी के वेश में रहने लगे। मंदिर के अंदर गणेश भगवान के अलावा पांचों पांडवों के भी चित्र हैं। शाम के समय यहां से डूबते सूरज को देखना बेहद रोमांचक लगता है।
हाजो
गुवाहाटी से 32 किलोमीटर दूर हाजो में असमी कल्चर का पूरा प्रभाव दिखता है। यह हिंदू , मुस्लिम और बौद्ध तीनों धर्म के लोगों के लिए पवित्र स्थान है।
कैसे पहुंचें
गोपीनाथ बरदोलोइ इंटरनैशनल एयरपोर्ट गुवाहाटी से 18 किलोमीटर की दूरी पर है और देश के विभिन्न हिस्सों से कई एयरलाइंस यहां तक के लिए अपनी सर्विस दे रही हैं। वहीं दिल्ली से गुवाहाटी जाने के लिए बहुत - सी ट्रेन भी उपलब्ध हैं।

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गुवाहाटी:प्रकृतिभक्तिसंगम

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