हैलो रायपुर
Hello Raipur
Reflection of Chhattisgarh
Home प्रेम कहानी Love Stories

सपनों के राजकुमार-भाग 1


आजाद हिंद एक्प्रेस पूना से बिलासपुर लौटते वक्त मेरी आंख लग गयी और मै अपने बचपन
में पहुंच गया। मेरा बचपन बिलासपुर में गुजरा। तब होता था एक छोटा सा बिलासपुर,
रेल्वे कालोनी, बाल्को, एन-टी-पी-सी- के कुछ क्वाटर तथा बाजार, शहर की छोटी सी
बसाहट थी। मेरे पिता का छोटा सा कपड़े का व्यवसाय था। मैं सरकारी स्कूल में पढ़ता था।
स्कूल में सबसे अधिक प्रतिभावान छात्रों में मेरी गिनती होती थी। डिबेट, नाटक हो या
पढ़ाई सभी में अव्वल रहता था। खेल के क्षेत्र में भी अच्छा खासा दखल था। कक्षा
ग्यारहवीं पहुंचते-पहुंचते पूरे स्कूल में मेरा नाम हो गया। स्कूल के शिक्षक आपस
में बातें करते कि बहुत सालों बाद ऐसा लड़का आया है जो दसवीं बोर्ड परीक्षा में
मेरिट में आया तथा अन्य क्षेत्रों में भी स्कूल का नाम रौशन करेगा। ग्यारहवीं की
छैमाही परीक्षा चालू हुई। हमारा पेपर सुबह 7 बजे से 10 बजे तक होता था और उसी कक्षा
में बाद में अठवीं वालों का पेपर होता था। एक दिन परीक्षा समाप्ति के दस मिनट पहले
मेरी नजर खिड़की से बाहर गई, मैने देखा कि एक छोटी सी गुढ़िया जैसी सुंदर लड़की मुझे
एकटक देख रही है। मै वापस अपना पेपर देने भिड़ गया। मेरे दो पेपर बाकी थे। अगले पेपर
के वक्त, पेपर खत्म होने के पहले वह नन्ही गुड़िया उसी तरह से मुझे एकटक देख रही थी।
मैने आंखों के इशारों से पूछा क्या बात है वह झेंप गयी। हमारा आखरी पेपर सुबह 10:30
बजे से था और आठवीं वालों का उसी रूम में सुबह 7 से 10 बजे से था। मै समय से पहले
पहुंच गया था। मैने देखा कि मेरी ही जगह पर बैठ कर वह खूबसूरत लड़की अपनी परीक्षा दे
रही थी। वह बहुत ध्यान से पेपर दे रही थी। उसके हाव-भाव से लग रहा था कि वह पढ़ाई
में काफी होशियार है। मै उसे देख ही रहा था कि अचानक उसकी नजर मुझ पर पड़ी और उसने
मुस्कुराकर आंखों से पूछा क्या बात है। मै झेपकर भाग खड़ा हुआ। पेपर देने जब डेस्क
पर बैठा तो उस पर एक वाक्य लिखा हुआ देखा ’आप राजकुमार हैं’ है ना? मेरे अंदर सनसनी
सी फैल गई। यह उसने मेरे लिए लिखा था या किसी और के लिये। पेपर देकर मै घर लौट आया
और मै उस घटना को भूल गया।



कुछ महिनों बाद ग्यारहवीं के बच्चों को, आठवीं की कुछ कक्षाएं पढ़ाने का कार्य
दिया गया। उनमें मै भी चुना गया। हमारी कक्षाएं शनिवार का छोड़कर सुबह 7:30 से 12:30
बजे तक रहती है और उनकी 12:30 बजे से 5:30 तक। शनिवार को उनकी कक्षाएं सुबह लगती और
हमारी दोपहर को। उसी दिन जल्दी जाकर हमें आठवीं के बच्चों की क्लास लेना तय था।
प्रत्येक लड़के का साल में दो क्लास लेने को मिलता था। वह भी लगातार दो हते। आठवीं
कक्षा के आधे से अधिक बच्चे, उस क्लास से पहले ही भाग जाते थे और ग्यारहवीं वाले भी
प्राय: दूसरी क्लास लेने से बचते थे। मै अपनी क्लास लेने के लिए बहुत तैयार होकर
पढ़ने की तैयारी के साथ गया। कक्षा में घुसते ही साथ मैने अपना परिचय देना चालू
किया। मै राजीव तिवारी कक्षा ग्यारहवीं का छात्र आज आप लोगों को गणित पढ़ाऊंगा।
अचानक एक खनकती मस्ती भरी आवाज सुनाई पड़ी। आप तो इस स्कूल के हीरो हैं, आपको कौन
नही जानता राजीव सर। मैने उसे जोर से डांट दिया वह पहली लाईन की सबसे कोने वाली जगह
पर बैठी थी। उसकी आंखे डबडबाई पर वह कुछ नही बोली पूरे पिरियड वह मुझे एकटक देखती
रही। मैने उससे कोई सवाल नहीं किया और न ही उसने। बाद में मुझे लगा कि मैने उसके
साथ ज्यादा बुरा बर्ताव कर दिया है पर कुछ कहने या माफी मांगने की मेरी हिम्मत नही
हुई।

Tags :
LoveStoryPremKahani सपनोंराजकुमार-भाग

सपनों के राजकुमार-भाग -11 सपनों के राजकुमार-भाग -10 सपनों के राजकुमार-भाग -9 सपनों के राजकुमार-भाग -8 सपनों के राजकुमार-भाग -7 सपनों के राजकुमार-भाग -6 सपनों के राजकुमार-भाग -5 सपनों के राजकुमार-भाग -4 सपनों के राजकुमार-भाग -3 सपनों के राजकुमार-भाग -2 सपनों के राजकुमार-भाग 1
1 |
Contact Us | Sitemap Copyright 2007-2012 Helloraipur.com All Rights Reserved by Chhattisgarh infoline || Concept & Editor- Madhur Chitalangia ||