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इबोला की वैक्सीन एनिमल टेस्ट में पास


कौन्तेय सिन्हा (टीएनएन), लंदन

इबोला की सूंघकर ली जाने वाली पहली वैक्सीन एनिमल टेस्ट में पास हो गई है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस के वैज्ञानिकों की मानें तो इस वैक्सीन की सफलता का रेट काफी अच्छा है, पर यह अभी डेवलप होने की अवस्था में है। एनिमल पर हुए टेस्ट में इबोला वायरस के खिलाफ इसमें लंबे समय तक प्रतिरोधी क्षमता रहने की पुष्टि हुई है। प्री क्लिनिकल स्टडी से साफ हो गया है कि सूंघ कर ली जाने वाली इस वैक्सीन को एकबार ही लेना काफी है और उम्मीद है कि भविष्य में इस महामारी को कंट्रोल करने में यह अहम भूमिका निभा सकती है। अच्छी बात यह है कि अफ्रीका के दूरदराज के इलाकों में भी इसे ले जाने, स्टोर करके रखने और इंजेक्ट करने में भी काफी आसानी होगी। इस वैक्सीन के बारे में आधिकारिक जानकारी अमेरिकी शहर विनिपेग स्थित नैशनल माइक्रोबयॉलजी लैब के प्रोफेसर मारिया क्रोयले और डॉ. गैरी कोबिंजर 5 नवंबर को करेंगे। प्रोफेसर मारिया सात साल से सूंघकर लिए जा सकने वाले इस फॉर्म्युले पर काम कर रही थीं। बंदरों में इसकी सफलता की दर 67 से 100 फीसदी देखी गई है। इबोला से पीड़ित व्यक्तियों के मरने की दर 70 फीसदी से ज्यादा है, जिसे देखते हुए यह बीमारी दुनिया भर की चिंता का सबब बनी हुई है।

वायरस को निष्क्रिय कर सकता है कॉपर

ब्रिटेन की साउथैंप्टन यूनिवर्सिटी की एक स्टडी की मानें तो रोजमर्रा में आम लोगों के छूने वाली चीजों को ठोस तांबे या तांबा मिली धातुओं की चीजों से बदल दिया जाए तो इबोला वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। मसलन दरवाजों के हैंडल, नल, बिजली के स्विच आदि अगर कॉपर के हों तो अच्छा है, क्योंकि इस धातु में हाइजेनिक गुण हैं, जो इबोला वायरस को निष्क्रिय कर सकते हैं। यह स्टडी इबोला जैसे जेनेटिक पैटर्न वाले वायरसों की स्टडी से सामने आया है। इस स्टडी का इस्तेमाल सार्वजनिक जगहों पर किया जा सकता है।

सिएरा लियोन में डॉक्टर की मौत

अफ्रीकी देश सिएरा लियोन में इबोला से संक्रमित एक स्थानीय डॉक्टर की मौत हो गई है। वायरस के संक्रमण से डॉक्टर के जान गंवाने का यह पांचवा मामला है। यूनीसेफ ने इबोला से सर्वाधिक प्रभावित तीन पश्चिमी अफ्रीकी देशों - गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में अपने कर्मचारियों की संख्या 300 से बढ़ाकर 600 कर दी है। इन देशों में इबोला के 20 फीसदी मामले बच्चों में देखे गए हैं। दूसरी ओर, इबोला प्रभावित देशों से लौटे मेडिकल स्टाफ को अलग-थलग किए जाने की नीति बदल चुके अमेरिका में तीन-चौथाई से ज्यादा लोग मानते हैं कि इस तरह के मेडिकल स्टाफ को अलग-थलग ही रखा जाना चाहिए।

2015 में आ सकता है डेंगू का टीका

भाषा, मुंबई

दुनिया में डेंगू का पहला टीका 2015 की दूसरी छमाही में उपलब्ध हो सकता है। सनोफी के वैक्सीन डिविजन ने मंगलवार को इसका ऐलान किया। क्लिनिकल स्टडी बताती है कि यह टीका डेंगू की गंभीर बीमारी में भी 95.5 फीसदी सुरक्षा प्रदान करता है और इससे अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 80.3 फीसदी तक कम हो जाता है। कंपनी इस वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के लिए अर्जी देगी और अगर रेग्युलेटर से ग्रीन सिग्नल मिलता है तो डेंगू का पहला टीका 2015 की दूसरी छमाही में उपलब्ध हो सकता है।

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